" किसकी ख़ता "

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किसकी ख़ता बोलो किसकी ख़ता  ,
चलो ये माना सारी मेरी ख़ता, 
पर मिली भी तो मुझको ही सज़ा ,
जिंदगी बन गई है  क़ज़ा ।

 बिछड़ के तुझसे हम जी ना सके ,
 तड़प के दिन बीते रो रो के रात कटे ,
तुझे तो गैरों के बाँहो में आया मज़ा ।

 एकपल में मुझको पराया कर दिया ,
मैं तेरी कुछ नहीं कहा और चल दिया ,
प्यार का रिश्ता टूटा उसमें तुम्हारी थी रज़ा ।


 राधा बनी ना मीरा बनी, 
देखों मैं पगली दीवानी बनी ,
मैं तेरे क़ाबिल नहीं मुझको है ये  पता।

आज भी तेरी ख़ुश्बू मुझमें समाई है ,
आज भी तेरी याद मुझमें लेती अंगड़ाई है ,
रह रह कर आती है क्यूं हिचकियां
क्या आज भी तेरे दिल में हूँ सच बता।
           पूजा 'बहार'(नेपाल )