*उधार खाता*
-“राजेश राजेश ...”प्रमोद ने आवाज लगाई ।राजेश बाहर आया
-“क्या बात है प्रमोद.. आओ आज सुबह सुबह कैसे ?”
-“अरे राजेश चलो यार आज राहुल के घर चलते हैं ।”प्रमोद बोला ।
-“ क्यों भाई ..अभी तो नाश्ता भी नहीं हुआ है ।”
-“अरे तुम चलो तो ..आज नाश्ता हम करवाएंगे तुम्हें ।”
दोनों मित्रों ने स्कूटर उठाया और चल दिये ।राहुल के घर जैसे ही पहुँचे राहुल उनको देख एकदम सिटपिटा गया
-“अरे प्रमोद भाई सुबह-सुबह कैसे ?”
-“तुम मुझे देखकर इतना घबरा क्यों जाते हो ,इधर से निकल रहा था तो सोचा तुमसे मिलता चलूं ,मिलो ..यह मेरा दोस्त राजेश है ।
उसने हाथ तो मिलाया पर बड़ी मायूसी से ,फिर कहने लगा -“प्रमोद भाई चाय पिएंगे ?”
-“क्यों भाई सूखी चाय ही पिलाओगे ..चलो थोड़ा नाश्ता भी हो जाए ।”
-“चलिए “ वह बड़ी कठिनाई से बोला तीनों मित्र चाय के ठेले पर पहुंचे पोहे जलेबी का नाश्ता किया ।
-“अरे राहुल तुम नहीं ले रहे ।” राजेश ने पूछा ।
-“नहीं..आप लोग नाश्ता कीजिए ,मैं तो सिर्फ चाय पी लूंगा।”
₹70 का बिल बना जो राहुल ने अदा किया और कहने लगा -
-“अच्छा चलता हूं प्रमोद भाई ।”
-“अरे रुको रुको..कहां भागे जा रहे हो मेरा ई.एम.आई. कब दोगे ?”
-“दे दूंगा भैया ..जल्दी ही दूँगा ।”
-“अच्छा तो फिर मैं परसों आऊंगा ।”
-“अरे नहीं नहीं ..मैं खुद ही दे जाऊंगा अच्छा मैं चलता हूं ।”कहता हुआ वह निकल गया ।
राजेश बड़े असमंजस में था ।
-“यह ई.एम.आई.का क्या चक्कर है प्रमोद ।”
-“कुछ नहीं यार इसने मुझसे ₹3000 उधार लिए थे ₹300 महीने देने का कहा था ,अब मैं ब्याज तो लेता नहीं हूँ इसी तरह अपनी कुछ सेवा करवा लेता हूं ।”
-“मैं तुम्हारा मतलब