असली रावण ऊँची सी बड़ी हवेली सफ़ेद रंग से पुती हुई संगरमरमर से जड़ी हुई बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ ,महंगी गाड़ियों की लाइन,पुलिस की 2 गाड़ी, बाहर दूर विदेशी जाति के 4 खूंखार दिखने वाले कुत्ते ,हवेली के आगे पोर्च जिसमें बढ़िया सोफा लगा जिसपे गणमान्य लोग बैठते हैं जिसपे सफ़ेद पोशाक में बड़ी मूछों पर ताव चढ़ाए आँखों मे महंगा काला चश्मा टिकाए हुए हाथों में महंगी घड़ी और गले में सीकड़ देखते ही मन टिक जाए ऐसे दिखते है मंत्री और विधायक श्री मुन्नालाल जी। जनता के तमाम सवालों को सुनकर उनका जवाब दे रहे और जरूरत मंद को रुपयों से भरा लिफ़ाफ़ा पकड़ाया जा रहा साथ ही लोगों की खाने की व्यवस्था की गई। सब समस्या सुलझा कर विधायक जी अपनी हवेली में गए फिर आधा घण्टे बाद बाहर निकले और पूरे दल बल के अपनी महँगी गाड़ी में बैठ कर निकल गए जनता के बीच। लोगों के मन में विधायक जी की बहुत इज़्ज़त है जिनकी वो बड़ी मदद करते हैं और गरीबों की सुनते है। अभी हाल में ही हलिया के बेटे की फ़ीस का इंतज़ाम नहीं था उसकी परीक्षा आने वाली थी तब विधायक जी ने पूरी फीस माफ़ कर दी थी और ऊपर से परीक्षा हेतु समान भी उपलब्ध करवाया था। हम बात करते हैं अभी एक सूनसान कमरे की जिसमें एक भी खिड़की नहीं है अंधेरा का पूरा एकछत्र राज व्याप्त है। शांति इतनी की सांसे भी सुनी जा सकती हैं लेकिन अभी सिर्फ दर्द और चीखें उठ रही जो उस कमरे में बंद 12 किशोरियों की है जो अभी बचपन के दिन बिताकर किशोरावस्था की धरती को चूमने को तैयार है। तभी अचानक दरवाजा खुलता है और दो मोटे मोटे आदमी हाथों में लाठी किये प्रवेश करते हैं और अपने शरीर के मानिंद कड़क आवाज़ में कहते हैं," क्यों री! सब ठीक हो कोई मर तो न गयी। आज तुम सबको बाहर जाना है।चुपचाप कुछ घण्टे रहो वरना हाथ पैर तोड़ के भीख मंगवाऊंगा।" इसके बाद सारी लड़कियाँ सहम कर चुप हो जाती और वो दोनों आदमी अट्टहास लगा कर हसंते निकल जाते जैसे उन्होंने किसी भारी शेर का शिकार कर लिया हो। ये सब लड़कियाँ यहाँ पकड़ कर या फिर उठा कर लायी गयी है और आज इनकी तस्करी होगी। जिस्म के भूखे दरिंदे इनकी मंडी सजायेंगे और फिर बोली लगा कर इनकी शुरू होती किशोरावस्था को कलंकित करके आंनद का अनुभव करेंगे और हमेशा हमेशा के लिए इन सब पर एक दाग़ और दर्द छोड़ जाएंगे ऐसा दाग जिससे इन्हें खुद इनके जिस्म से नफ़रत हो जाये। जिसके बाद शहर के किसी कोठे पर हर रोज़ इनकी जवानी को पैसों और धन से तोला जाएगा और हर रात के लिए कोई इन्हें अपनी बिस्तर की चीज़ बनाकर सुबह दुत्कारेगा। कुछ घंटे बीत जाते हैं और आदमी के कहे अनुसार सब लड़कियों को जबरदस्ती पकड़ कर एक ट्रक में डाल कर बंद कर दिया जाता। तभी एक गाड़ी आकर रुकती और जिसमें में एक आदमी उतरता है। उसकी आवाज़ सुनाई देती ," इन सबको समय पर पहुँचा देना। जो सबसे सुंदर और जवान हो ,अच्छे नक्श की हो उसे आज इधर ही रोक देना।" इसके बाद वो आदमी लौट आता और सभी लड़कियों में से जिसकी उम्र 17 थी उसे उतार लिया जाता। उसका नाम सपना था जो 17 वर्ष की है दिखने में बड़ी मासूम और सुंदर है। शरीर जिसका अभी अभी भरना शुरू हुआ है। पतली सी कमर, गेहुँआ सा रंग और बड़ी आँखे उसकी तरफ सबको आकर्षित करते है। उसको उतार कर बाकी ट्रक भेज दिया गया। ट्रक आगे बढ़ता है और करीब आधी रात को राज्य की सीमा पर पहुँचता है जहां पुलिस रोकती है और पूछे जाने पर आवाज़ आती जाने दो ये तो मंत्री जी के आदमी। हाँ वही मंत्री जी जो बड़े दयालु और प्रजा की सेवा में लगे है और गरीबों के मसीहा है,हर औरत के सम्मान में खड़े होने वाले भैया हैं उनकी स्याह हक़ीक़त तो कुछ और है। सुंदर चेहरे के पीछे एक राक्षस छुपा है। जो ये भी काम करता है। इधर सपना को नहाने हेतु समान दिए जाते और सुंदर कपड़े भी मिले और आदेश भी की जल्दी नहा कर तैयार हो जा आज तुझे साहब इनाम देंगे। वो मासूम क्या जाने? आज उसकी अश्मिता के चीथड़े उढ़ाये जाएंगे और एक नरभक्षी मानव आकर उसकी मासूमियत की बेरहमी से हत्या करेगा। रात के 10 बजे जनता का कार्य निपटा कर मंत्री जी उस जगह आते और सीधे कमरे में जाते जहाँ पहले से सपना बैठी है। उनकी आहट पाकर वो दूर जाकर खड़ी होती लेकिन मंत्री उसको बुलाता है । मंत्री शराब में मस्त है और शबाब के लिए व्याकुल भी है। वो सपना को बुलाता है थोड़ी देर इधर उधर की बातें करता फिर डाँटता धमकाता है। ऐसा माहौल है जैसे किसी शेर के पँजे में चूहा हो। मंत्री अपने नापाक हाथों से उसकी पवित्रता को रौंद कर रख देता वो चिल्लाती रहती लाख मिन्नतें करती लेकिन राक्षसों को लोगों की चीखों से और ताक़त मिलती है। उसकी हर एक चीख़ बंद कमरे में दब के रह जाती है और मंत्री बड़ी ताकत दिखा कर मासूमियत का मर्दन करता है। अगले दिन वह सुबह फिर रोज़ की भांति अपने सामाजिक रूप में आकर ढोंग करने लगता। नवरात्रि शुरू होने को है तो मंदिर वाले आये हैं जिन्हें वो 11000 रुपये का दान करता और आखिरी रावण को जलाने के समारोह में आने का वायदा भी करता है। एक रावण अगले रावण को जलाएगा लेकिन वो रावण भी हरण करने के उपरांत एक स्त्री को बिना उसकी मर्जी के कभी छूने की कोशिश न किआ और ये रावण स्त्री के रूप में आने के पहले किसी की इज़्ज़त पे दाग लगाता है और फिर नवरात्रि में देवी के नाम पर दान करता है। अगले हफ्ते से फिर अखबारों में खबरें निकलती रहती की कोई किशोरी भाग गई तो कोई लापता। आज तक कोई मिलती नहीं क्योंकि या तो वो मार दी गयी या फिर उनको तस्करी के किये बेंच दिया गया है। जिसका सारा श्रेय गरीबों के मसीहा बनने वाले मुन्नालाल को जाता है। जो सामाजिक राम के मुखौटे में रावण से बड़ा राक्षस है । अगले हफ़्ते रावण को जलाने का कार्यक्रम होता है और मंत्री जी अपने हाथों से रावण को जला कर पाप को खत्म करने की शिक्षा देते हैं। रावण भी हरिलोक से कह रहा होगा कि आज के रावण मुझसे भी बड़े राक्षस निकले उन्हें जलाना ज्यादा सही होगा। मंत्री फिर फिर किसी देवी की इज़्ज़त पर हाथ डालने निकल जाता और पूरे आवाज़ के साथ मेले में माइक पर किसी की आवाज़ गूँजती रहती है।"मंत्री जी जैसे मसीहा बनो रावण जैसे पापी नहीं। औरतों का सम्मान करो"। लोग ज़िंदाबाद के नारे लगाते हुए हर्ष मनाते हैं और रावण जलता हुआ सोचता रहता कि असली रावण को बाहर है मैं क्यों जल रहा?